इंदौर। प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (PIMR) डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के पहले (फाउंडिंग) बैच के विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ समारोह-2026 में शिक्षा जगत, उद्योग और मीडिया से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को केवल डिग्री या नौकरी तक सीमित न रहकर नैतिक मूल्यों, नवाचार, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
समारोह के मुख्य वक्ता आईआईएम इंदौर के प्रो. पवन कुमार सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “कक्षा में संगीत रचो, शोर नहीं।” उन्होंने विद्यार्थियों से पद, प्रतिष्ठा और धन की अंधी दौड़ से बचने तथा ज्ञान, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी को सफलता का आधार बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ग्रेजुएशन जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक नींव है। विद्यार्थियों को बुनियादी विषयों की मजबूत समझ, विश्लेषणात्मक सोच, प्रभावी संवाद कौशल और स्वाध्याय की आदत विकसित करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने ChatGPT और अन्य AI तकनीकों को सीखने का सहायक माध्यम बताते हुए कहा कि इन्हें ज्ञान का विकल्प नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अपनाया जाना चाहिए।
डिग्री नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम है विश्वविद्यालय
PIMR के चांसलर डॉ. डेविश जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, टीमवर्क और नैतिक मूल्यों का निर्माण करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक और नवाचार को अपनाने के साथ मानवीय संवेदनाओं और करुणा को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि “ज्ञान सफलता दिला सकता है, लेकिन मूल्य सम्मान दिलाते हैं।”
अपने सपनों को पहचानें, सिर्फ अंकों के पीछे न भागें
मोअरयाह्स और क्विकिट के संस्थापक एवं सीईओ अखिलेश गांधी ने विद्यार्थियों से कहा कि वे परीक्षा के अंकों और सामाजिक अपेक्षाओं से आगे बढ़कर अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का निर्माण करें। उन्होंने युवाओं से जिज्ञासु बने रहने, नए प्रयोग करने और नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले उद्यमी बनने का आह्वान किया।
अनुभव और नेतृत्व से बनेगा भविष्य
कुलपति डॉ. एस.एस. भाकर ने इसे विद्यार्थियों के जीवन की नई शुरुआत बताते हुए इंटर्नशिप, अनुभवात्मक शिक्षण, उद्यमिता और नेतृत्व के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने की सलाह दी।
प्रेस्टीज एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. हिमांशु जैन ने विश्वविद्यालय जीवन को आत्म-खोज और समग्र विकास की यात्रा बताया, जबकि डायरेक्टर एडमिशन डॉ. राजीव रघुवंशी ने कहा कि स्थायी सफलता का आधार केवल अच्छे अंक नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, धैर्य और नैतिक मूल्य हैं।
ध्यान साधना और छात्र प्रकाशनों का विमोचन
समारोह का विशेष आकर्षण मनीष बोहरा द्वारा संचालित ‘राममंत्रम ध्यान साधना’ सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों को एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता का महत्व बताया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने छात्र प्रकाशन ‘स्वागत’ और ‘यूजी कैंपस एक्टिविटीज स्मारिका’ (डिजिटल संस्करण) का विमोचन भी किया। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक दीक्षारंभ संस्कार के साथ हुआ।
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