इंदौर। मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रहा इंदौर अब मेडिकल नॉलेज-एक्सचेंज और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए भी विदेशी डॉक्टरों को आकर्षित कर रहा है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से तीन ऑर्थोपेडिक एवं ट्रॉमा सर्जन एडवांस जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीकों को समझने और सीखने के लिए इंदौर पहुंचे। उन्होंने यूनिक हॉस्पिटल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. के. के. नीमा के साथ प्रशिक्षण और ऑब्जर्वेशन के माध्यम से घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीकों को करीब से समझा।
दुशांबे से आए विशेषज्ञों में मॉडर्न ऑर्थोपेडिक क्लिनिक के डॉ. अब्दुखोलिक तथा इस्तिकलोल हॉस्पिटल के डॉ. इस्मोइलजॉन और डॉ. योकुबजॉन शामिल रहे। तीनों सर्जन्स ऑर्थोपेडिक एवं ट्रॉमा सर्जरी के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इंदौर प्रवास के दौरान उन्होंने जॉइंट रिप्लेसमेंट में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, सर्जिकल अप्रोच तथा रोबोटिक और नेविगेशन आधारित प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।
रोबोटिक और नेविगेशन तकनीकों का किया ऑब्जर्वेशन
प्रशिक्षण के दौरान ताजिक सर्जन्स ने टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) और टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) से जुड़ी आधुनिक प्रक्रियाओं का ऑब्जर्वेशन किया। इस दौरान नेविगेशन के साथ सबवास्टस अप्रोच द्वारा टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी, रोबोटिक तकनीक के साथ सबवास्टस अप्रोच द्वारा टोटल नी रिप्लेसमेंट तथा डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच (DAA) द्वारा टोटल हिप रिप्लेसमेंट जैसी तकनीकों की बारीकियों को समझाया गया।
सर्जन्स ने सर्जरी की प्लानिंग, मरीज की जॉइंट कंडीशन के अनुसार तकनीक का चयन, इम्प्लांट की पोजिशनिंग, अलाइनमेंट और सर्जरी के दौरान सटीकता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी जानकारी ली। रोबोटिक और नेविगेशन आधारित तकनीकों के माध्यम से सर्जिकल सटीकता बढ़ाने तथा मरीजों के लिए बेहतर परिणाम हासिल करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
इंदौर बन रहा मेडिकल नॉलेज-एक्सचेंज का केंद्र
विदेशी सर्जन्स का एडवांस सर्जिकल तकनीकों को सीखने के लिए इंदौर आना शहर के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल इकोसिस्टम को नई पहचान दे रहा है। इंदौर पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। अब विदेशी विशेषज्ञों का यहां प्रशिक्षण और नॉलेज-एक्सचेंज के लिए पहुंचना शहर को मेडिकल एजुकेशन और इंटरनेशनल हेल्थकेयर कोलैबोरेशन के एक संभावित केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
यूनिक हॉस्पिटल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. के. के. नीमा ने कहा, “मेडिकल साइंस लगातार विकसित हो रही है और विशेषज्ञों के लिए सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। अलग-अलग देशों के सर्जन्स जब एक-दूसरे के अनुभव और तकनीकों को समझते हैं, तो इसका लाभ अंततः मरीजों को मिलता है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट में उपलब्ध तकनीकों और अपने अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाए, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को सुरक्षित, सटीक और बेहतर परिणाम मिल सकें। ताजिकिस्तान से सर्जन्स का इंदौर आकर इन तकनीकों को समझना भारत और ताजिकिस्तान के बीच मेडिकल नॉलेज-एक्सचेंज की दिशा में सकारात्मक कदम है।”
तीनों ताजिक सर्जन्स ने इंदौर में मिले प्रशिक्षण और डॉ. नीमा के साथ हुए नॉलेज-एक्सचेंज को उपयोगी बताया। डॉ. अब्दुखोलिक, डॉ. इस्मोइलजॉन और डॉ. योकुबजॉन ने संयुक्त रूप से कहा, “इंदौर में हमें जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की आधुनिक तकनीकों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। विशेष रूप से रोबोटिक एवं नेविगेशन तकनीक, सबवास्टस अप्रोच और डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच के व्यावहारिक पहलुओं को समझना हमारे लिए बेहद उपयोगी रहा। डॉ. के. के. नीमा ने अपने अनुभव और तकनीकी ज्ञान को हमारे साथ विस्तार से साझा किया। यहां से प्राप्त जानकारी को हम ताजिकिस्तान लौटकर अपने मरीजों के उपचार में उपयोग करने का प्रयास करेंगे। हमें उम्मीद है कि इस तरह के नॉलेज-एक्सचेंज कार्यक्रम दोनों देशों के चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगे।”
इंदौर में देश के विभिन्न हिस्सों से मरीज आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए पहुंचते रहे हैं। अब विदेशी सर्जन्स का एडवांस सर्जिकल तकनीक सीखने के लिए यहां आना शहर के मेडिकल इकोसिस्टम के विस्तार का संकेत है। इससे मेडिकल टूरिज्म के साथ मेडिकल एजुकेशन, विशेषज्ञों के बीच नॉलेज-शेयरिंग और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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