प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब इंदौर का सफाई मॉडल लागू किया जाएगा। इसी को लेकर मंगलवार को इंदौर के अधिकारियों ने वाराणसी के अफसरों के साथ बैठक की, जिसमें घर-घर कचरा संग्रहण, गीला-सूखा कचरे का पृथक्करण, रीसायक्लिंग समेत कई अहम विषयों पर जानकारी साझा की गई। इस उद्देश्य से इंदौर और भोपाल से अधिकारियों की एक टीम वाराणसी रवाना हुई है, जो वहां चार दिन तक रुककर स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुसार सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव देगी।
दिल्ली से नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश दिए गए थे कि वाराणसी में इंदौर जैसी सफाई व्यवस्था लागू कराई जाए। इसके तहत पहले इंदौर मॉडल से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें दस्तावेजों के साथ वीडियो और फोटो भी शामिल थे। अब अधिकारी वाराणसी में जाकर पूरी योजना पर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करेंगे। यह पहली बार है जब इंदौर के अधिकारी किसी दूसरे शहर में जाकर सफाई व्यवस्था को लेकर सुझाव दे रहे हैं, जबकि अब तक देश-विदेश के 100 से अधिक शहरों के अधिकारी इंदौर आकर इसके मॉडल का अध्ययन कर चुके हैं।
इंदौर का सफाई मॉडल बेहद सफल और व्यवस्थित माना जाता है। यहां सौ प्रतिशत कचरा डोर-टू-डोर संग्रहण के माध्यम से सीधे ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचता है। छह अलग-अलग प्रकार के कचरे वाहन पहले ही कचरे को अलग-अलग कर लेते हैं, जिससे प्लांट पर अलगाव की जरूरत नहीं पड़ती। शहर में एक भी कचरा पेटी नहीं है और लोग खुले में कचरा नहीं फेंकते। नगर निगम ने मोबाइल ऐप के जरिए भी कचरा संग्रहण वाहन बुलाने की सुविधा उपलब्ध कराई है।
इसके अलावा इंदौर में कचरे से खाद और सीएनजी बनाई जा रही है, जबकि प्लास्टिक कचरे से ईंधन तैयार कर सीमेंट फैक्ट्रियों को उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, निर्माण मलबे से पेवर ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं। इन सभी कारणों से इंदौर सफाई के क्षेत्र में देश का अग्रणी शहर बन चुका है और अब उसका मॉडल वाराणसी में भी अपनाया जाएगा
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