इंदौर। शहर में करीब 1% महिलाएं सिंगल गर्ल चाइल्ड मदर्स हैं, जिनमें से आधी महिलाएं परिवार से अलग रहकर अपना और अपनी बेटियों का भरण-पोषण कर रही हैं। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को देखते हुए इन माताओं ने अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए कुछ खास तरीके अपनाए हैं। दिन के 4-5 घंटे, जब 7 से 15 साल की बेटियां घर से बाहर होती हैं, तब ये माताएं हमेशा अलर्ट मोड पर रहती हैं। कुछ माताओं ने बेटियों को सिखाया है कि किसी अनहोनी की स्थिति में चिल्लाकर भीड़ इकट्ठा करें या फिर घर पर डिलीवरी बॉय या कोरियर वाले आने पर मां को वीडियो कॉल करके ही पार्सल लें।
शहर की सिंगल गर्ल चाइल्ड मदर्स ने बेटियों की सुरक्षा के लिए कई तरह की प्लानिंग की है। किसी ने 7 साल की बेटी को सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सिखाया है, तो किसी ने स्कूल में किसी हादसे की स्थिति में बिना टीचर या पैरेंट्स की अनुमति के स्कूल से न निकलने की सीख दी है। वहीं, कुछ माताओं ने अनजान लोगों के घर आने पर वीडियो कॉल करके अभिभावकों को अलर्ट करने की सलाह दी है।

स्कूल में सुरक्षा के लिए टीचर से बात करना जरूरी
श्रद्धा सुमन, एक सिंगल पैरेंट, कहती हैं, “मेरी बेटी 5 साल की है। मैंने उसे गुड और बेड टच के बारे में समझाया है । अगर कोई स्कूल में आकर कहे कि मम्मी का एक्सीडेंट हो गया है, तो वह टीचर से फोन पर मुझसे या किसी जानकार से बात करे। बिना किसी को बताए किसी अनजान के साथ न जाए।”
लालच में न आ
ना
बरखा सोनी, एक मां, बताती हैं, “मैंने अपनी बेटी को सिखाया है कि स्कूल में कोई भी अनजान व्यक्ति चॉकलेट या खाने की चीज दे, तो तुरंत न लें। उसे घर लाकर हमें बताना है। कई बार इन चीजों में नशीले पदार्थ मिले होते हैं, जो बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।”
छोटी-छोटी बातें शेयर करना जरूरी
सीमा लाठी, एक मां, कहती हैं, “मेरी बेटी ने 12वीं की परीक्षा दी है। मैंने उसे सिखाया है कि किसी भी अनजान या जान-पहचान वाले के लिए दरवाजा तभी खोलें, जब मम्मी-पापा से बात हो जाए। स्कूल या दोस्तों के साथ कोई भी परेशानी हो, तो तुरंत हमें बताए।”
सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सीखना
मीनल जैन, एक सिंगल मदर, कहती हैं, “मेरी बेटी 7 साल की है। मैंने उसे सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे सिखाया है। साथ ही, उसे यह भी सिखाया है कि अगर किसी स्थिति में असहज महसूस करे, तो चिल्लाकर लोगों को बुलाए। घर पर अकेले होने पर किसी अनजान या जान-पहचान वाले के लिए तुरंत दरवाजा न खोलें, पहले पैरेंट्स से बात करे।”
घर पर पार्सल लेने से पहले वीडियो कॉल
श्वेता कानूनगो, एक मां, बताती हैं, “मेरी बेटी 10 साल की है। मैंने उसे सिखाया है कि घर पर कोई पार्सल आए, तो बाहर निकलने से पहले वीडियो कॉल करे और पार्सल लेकर घर आने के बाद ही कॉल कट करे। साथ ही, घर के सभी सदस्यों के मोबाइल नंबर याद करवाए हैं।”
एक्सपर्ट की सलाह : पैरेंटिंग एक्सपर्ट श्याम अग्रवाल के अनुसार :-
– हमेशा लड़के-लड़कियों के ग्रुप में रहें, जिसमें लड़कियों का अनुपात ज्यादा हो।
– घर पर अकेले होने पर जान-पहचान वाले व्यक्ति के आने पर भी दरवाजा खुला रखें।
– गुड और बेड टच के बीच का अंतर समझें।
– अगर किसी के आने से असहज महसूस करें, तो तुरंत किसी सहेली के घर या ट्यूशन जाने का बहाना बनाकर घर से निकल जाएं।
इन सभी उपायों के जरिए सिंगल मदर्स ने अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत ढाल तैयार की है।
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