इंदौर। BRICS कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन इंदौर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आतिथ्य का अनूठा संगम देखने को मिला। BRICS देशों सहित 20 से अधिक देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ बुधवार सुबह ऐतिहासिक राजवाड़ा पहुंचे, जहां उनके लिए विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया।
विदेशी डेलीगेट्स का स्वागत पारंपरिक मालवी अंदाज में किया गया। राजवाड़ा परिसर में होलकरकालीन दरबार की झांकी, हरकारों की गूंज, शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेहमानों को भारतीय परंपरा और मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इतिहासकारों ने उन्हें देवी अहिल्याबाई होलकर और होलकर शासनकाल से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी दी।
हेरिटेज वॉक के दौरान डेलीगेट्स ने गोपाल मंदिर का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने ऐतिहासिक भवनों की आकर्षक लकड़ी नक्काशी और स्थापत्य कला को करीब से देखा। मंदिर परिसर की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया।

इंदौर की पहचान बन चुके पारंपरिक नाश्ते पोहा-जलेबी का स्वाद भी डेलीगेट्स ने लिया। चाय और कॉफी के साथ परोसे गए स्थानीय व्यंजनों की मेहमानों ने सराहना की और मालवा की मेहमाननवाजी की प्रशंसा की।
BRICS कृषि सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से अधिक देशों के डेलीगेट्स भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि नवाचार, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी है। बुधवार को संयुक्त घोषणा-पत्र के मसौदे पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जबकि शाम को सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकें आयोजित होंगी।
सम्मेलन के पहले दिन भारत और रूस के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कृषि व्यापार बढ़ाने, तकनीकी सहयोग को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों देशों ने जलवायु-अनुकूल खेती और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति भी जताई।
9 से 13 जून तक चल रहे इस सम्मेलन को मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन प्रदेश को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर उपलब्ध करा सकता है।
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