इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने स्कीम-134 में बने सीनियर सिटीजन कॉम्प्लेक्स के संचालन के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। हालांकि, टेंडर में भाग लेने वाली फर्म के लिए एक विशेष शर्त रखी गई है—टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड की पारंपरिक प्रक्रिया के बजाय, अफसरों की टीम संबंधित एजेंसियों का इंटरव्यू लेगी। इस दौरान यह जांचा जाएगा कि एजेंसी बुजुर्गों की देखभाल में अपनत्व का भाव रखती है या नहीं। क्या वे उन्हें परिवार का सदस्य मानकर सेवा देंगे? नाश्ता, भोजन, दवाई और मनोरंजन की समुचित व्यवस्था किस प्रकार करेंगे? इन सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

आईडीए के सीईओ रामप्रकाश अहिरवार के अनुसार, टेंडर में भाग लेने वाले सभी एनजीओ, निजी संस्थाओं और फर्मों की बिड ओपनिंग 3 मार्च को की जाएगी। प्री-बिड प्रक्रिया के बाद फाइनल बिडिंग होगी। चूंकि यह सीनियर सिटीजन से जुड़ा विषय है, इसलिए एजेंसियों के कर्मचारियों की संख्या, उनकी योग्यता और बुजुर्गों के प्रति उनका दृष्टिकोण भी परखा जाएगा। इसके अलावा, एजेंसियों की तैयारियों की भी मैदानी स्तर पर जांच की जाएगी, जिससे बुजुर्गों को घर जैसा माहौल देने की उनकी क्षमता सुनिश्चित हो सके।
कॉम्प्लेक्स में बुजुर्गों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एटीएम, मेडिकल सुविधा और नजदीकी अस्पतालों के साथ टाई-अप भी किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

बुजुर्गों में बढ़ रही कॉम्प्लेक्स में रहने की रुचि
अब तक 60 से अधिक बुजुर्ग आईडीए कार्यालय पहुंचकर यहां रहने की जानकारी ले चुके हैं। कई दंपति अपने घर या फ्लैट छोड़कर इस कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होना चाहते हैं, जबकि अकेले रहने वाले बुजुर्ग भी लगातार आईडीए के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं और कॉम्प्लेक्स शुरू होने की तिथि पूछ रहे हैं।

अधिकतर आवेदक 70 वर्ष के करीब
राजेंद्र नगर, लोकमान्य नगर, रामबाग, तिलकनगर, धनवंतरि नगर और विजय नगर क्षेत्र के बुजुर्गों ने आईडीए से संपर्क किया है। इनमें से कई के बेटे-बेटियां विदेश में हैं, कुछ को पारिवारिक उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, तो कुछ को चोरी-लूट की आशंका और घरेलू कामकाज करने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में वे इस कॉम्प्लेक्स में रहने के लिए इच्छुक हैं और उचित किराया देने को भी तैयार हैं।
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