इंदौर. वर्तमान युग में सब कुछ आसानी से मिल सकता है किन्तु सच्चा मित्र मिलना मुश्किल है। दोस्ती में गरीबी-अमीरी का भेद नहीं होना चाहिए, बल्कि मन के निर्मल व सच्चे भाव का बंधन होना जरूरी है तभी मित्रता सार्थक होगी। उक्त विचार भागवताचार्य आयुष्य दाधिच ने उषा राजे परिसर में चल रहे ज्ञान यज्ञ का कृष्ण-सुदामा मिलन के उत्सव के साथ समापन पर व्यक्त किए।
भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए भागवताचार्य ने कहा हमारी मित्रता श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी निश्छल व नि:स्वार्थ होना चाहिए। श्रीकृष्ण-सुदामा जैसे मैत्री भाव की जरूरत आज पूरे विश्व को है। भागवत कथा इस कान से सुनकर दूसरे कान से निकालने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात करने के लिए है। कथा में तो हम रोज बैठते हैं, अब कथा को अपने अंदर बिठाने की भी जिम्मेदारी हमारी ही है।
उषानगर स्थित उषाराजे परिसर में श्रीनागर चित्तौड़ा महाजन वैश्य समाज द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ में मंगलवार को कृष्ण-सुदामा मैत्री प्रसंग चित्रण किया गया। कृष्ण-सुदामा मैत्री का जीवंत उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। समन्वयक धर्मेन्द्र गुप्ता ने बताया कि कथा की शुरूआत से पहले रमेश मेहता, जगदीश पाराशर, दामोदर महाजन, गुलाबचंद मेहता व ईशान गुप्ता ने व्यासपीठ का पूजन किया।
विद्वान वक्ता की अगवानी किरण महेन्द्र गुप्ता, रमेशचंद्र महाजन, ब्रजमोहन गुप्ता, गिरीश गुप्ता, अंकित हेतावल, पवन अकोतिया, नरेन्द्र अकोतिया, दिनेश गुप्ता ने की। महिलाओं ने ड्रेस कोड का पालन करते हुए लाल चुनरी व पुरुषों ने श्वेत परिधान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। संगीतमय कथा का समापन बुधवार को यज्ञ, हवन के साथ दोपहर 12 बजे पूर्णाहुति के साथ होगा।
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