इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले वर्ष 2019 के संशोधन को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में OBC वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। यह फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को सुनाया।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता के मुताबिक, यह निर्णय डब्ल्यूपी क्रमांक 5901/2019, अशिता दुबे एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य सहित संबंधित याचिकाओं पर सुनाया गया। इन मामलों में 5 अगस्त 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इस संशोधन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई और निर्णय के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को भेजा गया था।
प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के मुताबिक, कोर्ट को ऐसे असाधारण हालात नहीं मिले, जिनके आधार पर आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा पार करने को उचित ठहराया जा सके। कोर्ट ने दस्तावेजों, आंकड़ों और तालिकाओं का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल मामलों में दिए गए फैसलों को भी ध्यान में रखा गया।
होल्ड पर रखे 13% पद तीन महीने में भरने के निर्देश
हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से होल्ड पर रखे गए 13 प्रतिशत पदों को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। महाधिवक्ता के मुताबिक, कोर्ट ने 87 प्रतिशत विवादरहित पदों के अलावा शेष 13 प्रतिशत होल्ड पदों को अनारक्षित वर्ग की चयन सूची से भरने का आदेश दिया है।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल और अन्य संबंधित भर्ती एजेंसियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इससे विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में अटके पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं स्वीकार
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार, OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, EWS और क्षैतिज आरक्षण से जुड़ी अन्य राहत की मांग करने वाली याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
अब भर्ती एजेंसियों को हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
उज्जैन में OBC समाज ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद उज्जैन में OBC समाज के पदाधिकारियों और समाजजनों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के बाद एसडीएम पवन बारिया को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना में OBC वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग उठाई। कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष देवव्रत यादव ने कहा कि केंद्र सरकार के जनगणना फॉर्मेट में OBC का कॉलम नहीं होना पिछड़े वर्ग के हितों के विपरीत है।
उन्होंने मांग की कि जनगणना के फॉर्मेट में कॉलम नंबर 10 में संशोधन कर OBC जातियों की गणना की जाए, ताकि इस वर्ग की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जातिगत आंकड़े उपलब्ध होने से पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और उससे जुड़ी नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।
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