इंदौर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम में 400 से अधिक लोगों ने विशेषज्ञों से समझे बचाव और आधुनिक उपचार के तरीके
इंदौर। लंबे समय तक बैठकर काम करना, बढ़ता स्क्रीन टाइम, गलत पॉश्चर, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी का असर अब युवाओं की हड्डियों और जोड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। घुटने, कमर, गर्दन, रीढ़ और कूल्हों से जुड़ी समस्याएं अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं। 25 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
इन्हीं बढ़ती ऑर्थोपेडिक समस्याओं और उनके आधुनिक उपचार को लेकर शैल्बी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स की ओर से 26 सितंबर को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘इंदौर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक लोगों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने घुटने, कूल्हे, रीढ़ और कंधे से जुड़ी समस्याओं के साथ जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन केयर, स्पोर्ट्स इंजरी और आधुनिक सर्जरी तकनीकों पर जानकारी दी।
मोबाइल-कंप्यूटर और गलत पॉश्चर बन रहे परेशानी का कारण
कार्यक्रम में शैल्बी हॉस्पिटल के संस्थापक और घुटना रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल-कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल, गलत पॉश्चर और अनियमित दिनचर्या युवाओं में कम उम्र में ही कमर और गर्दन के दर्द के साथ घुटनों की समस्याओं का कारण बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर होने वाले दर्द या जोड़ों की परेशानी को नजरअंदाज करने से समस्या आगे बढ़ सकती है। समय पर जांच, सही उपचार और जीवनशैली में बदलाव से कई ऑर्थोपेडिक समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
डॉ. शाह के अनुसार, आधुनिक मिनिमली इनवेसिव और अन्य उन्नत सर्जिकल तकनीकों के कारण कई मामलों में मरीजों को कम दर्द और अपेक्षाकृत तेजी से रिकवरी का लाभ मिल रहा है। गठिया के कारण घुटनों और कूल्हों में होने वाली गंभीर समस्या के मामलों में जॉइंट रिप्लेसमेंट भी उपचार का एक विकल्प है।
रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट पर भी चर्चा
सिम्पोजियम में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी में अधिक सटीकता के लिए किया जाता है। इम्प्लांट की पोजिशनिंग और सर्जिकल प्लानिंग में तकनीक की मदद ली जाती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि शैल्बी हॉस्पिटल्स में अब तक 5000 से अधिक रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जा चुकी हैं।
स्पाइन और स्पोर्ट्स इंजरी को लेकर युवाओं को किया जागरूक
सिम्पोजियम में युवाओं में बढ़ रही स्पाइन संबंधी समस्याओं और स्पोर्ट्स इंजरी पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, गलत तरीके से बैठना, निष्क्रिय जीवनशैली और व्यायाम के दौरान गलत तकनीक अपनाना रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।
लोगों को नियमित स्ट्रेचिंग, सही पॉश्चर और रोजाना शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी गई।
इलाज के बाद रिहैबिलिटेशन भी जरूरी
कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की भूमिका पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऑर्थोपेडिक उपचार या सर्जरी के बाद सही रिहैबिलिटेशन से शरीर की ताकत, लचीलापन और गतिशीलता को दोबारा बेहतर करने में मदद मिलती है।
शैल्बी हॉस्पिटल्स के ग्लोबल ओपीडी डायरेक्टर डॉ. भरत गज्जर ने रोकथाम आधारित स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देते हुए कहा कि नियमित व्यायाम, संतुलित जीवनशैली और समय पर स्वास्थ्य जांच से कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर पहचानने में मदद मिल सकती है। उन्होंने लोगों तक विशेषज्ञ सलाह पहुंचाने और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।
विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे
कार्यक्रम में संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें उपस्थित लोगों ने विशेषज्ञों से अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर सीधे सवाल किए। घुटने और कूल्हे के दर्द, स्पाइन संबंधी परेशानी, खेल चोटों और आधुनिक उपचार विकल्पों से जुड़े सवालों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
शैल्बी हॉस्पिटल्स की ओर से बताया गया कि ‘शैल्बी से पूछा?’ अभियान के माध्यम से लोगों को विशेषज्ञ सलाह और आधुनिक उपचार विकल्पों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
डेंटल केयर सेवाओं की भी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान शैल्बी की अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का भी उल्लेख किया गया। अहमदाबाद स्थित शैल्बी हॉस्पिटल्स में डेंटल सेवाओं से जुड़ी डॉ. दर्शिनी शाह कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री और डेंटल इम्प्लांटोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत हैं। अस्पताल के अनुसार, सिंगल-सिटिंग रूट कैनाल ट्रीटमेंट और इमीडिएट लोडिंग डेंटल इम्प्लांट जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
सिम्पोजियम का उद्देश्य लोगों को हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ ऑर्थोपेडिक समस्याओं की समय पर पहचान, बचाव और उपलब्ध आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी देना रहा।
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